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DRDO Covid Drug 2DG Launched: आ गई कोरोना की पहली दवा 2DG, समझिए कैसे करेगी वायरस पर अटैक

  भारत समेत दुनिया के अधिकांश हिस्‍से में कहर बनकर टूटे कोरोना वायरस के लिए आखिरकार दवा आ गई है। 2-deoxy-D-glucose यानी 2डीजी नाम के इस ऐंटी-कोविड ड्रग को डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के वैज्ञानिकों ने बनाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हर्षवर्धन ने इस दवा का पहला बैच (10,000 डोज) लॉन्‍च क‍िया। हाइड्रॉक्‍सी क्‍लोरोक्विन, रेमडिसिविर, आइवरमेक्टिन जैसी तमाम दवाओं के कोविड-19 पर असर को लेकर पिछले साल से ही रिसर्च चलती रही, मगर 2DG वो पहली दवा है जिसे ऐंटी-कोविड ड्रग कहा जा रहा है। जानिए कैसे काम करेगी 2 DG ये दवा काफी हद तक ग्‍लूकोज जैसी है, मगर ग्‍लूकोज नहीं है। दरअसल, वायरस शरीर में पहुंचते ही अपनी कॉपीज बनाना शुरू कर देता है, इसके लिए उसे ताकत चाहिए होती है जो ग्‍लूकोज से मिलती है। जब कोरोना मरीज को ये दवा दी जाएगी तो वायरस इस ग्‍लूकोज एनालॉग को लेगा और उसी में फंस जाएगा। नतीजा ये होगा कि वायरस अपनी कॉपीज नहीं बना पाएगा यानी उसकी ग्रोथ रुक जाएगी। फिलहाल इस दवा को सेकेंडरी मेडिसिन की तरह यूज करने की परमिशन दी गई है। यानी ये प्राइमरी दवाओं के ...

इसलिए वैज्ञानिक अब धीरे-धीरे इस निष्कर्ष की तरफ़ बढ़ रहे हैं कि टीकों से भी बहुत समय तक बचाव नहीं हो सकेगा। कोरोना जैसे वायरसों से बचने के लिए हमें उन कारणों को दूर करना होगा जिनसे ये वायरस फैल रहे हैं। 1918 के स्पेनी फ़्लू से लेकर आज के कोरोना वायरस तक महामारी फैलाने वाले लगभग सभी वायरस जंगली या पालतू जानवरों से फैले हैं।

https://blog.scientificworld.in/2021/05/1918.html Shiv Kant :पूर्व सम्पादक बीबीसी हिंदी सेवा    कोविड की महामारी अमरीका, यूरोप और दक्षिण अमरीका के देशों के बाद अब भारत में तबाही मचा रही है। इस पर काबू पाने के लिए भारत को भी अमरीका, यूरोप और चीन की तरह टीकाकरण करना होगा। मुश्किल यह है कि व्यापक पैमाने पर फैल जाने के कारण अब कोरोना के इस वायरस के बाहरी खोल में बदलाव आने लगे हैं जिनकी वजह से यह और तेज़ी से फैलने लगा है। वायरस में आ रहे परिवर्तनों को देखते हुए टीका वैज्ञानिकों ने कहना शुरू कर दिया है कि लोगों को महामारी से बचाए रखने के लिए एक साल के भीतर एक टीका और लगाने की ज़रूरत पड़ सकती है। कुछ वैज्ञानिकों का तो यह भी मानना है कि इस महामारी से बचे रहने के लिए ज़ुकाम के वायरस की तरह ही शायद हर साल टीका लगवाना पड़े। टीका बेअसर भी हो सकता है और नया टीका बनाना पड़ सकता है। इसलिए वैज्ञानिक अब धीरे-धीरे इस निष्कर्ष की तरफ़ बढ़ रहे हैं कि टीकों से भी बहुत समय तक बचाव नहीं हो सकेगा। कोरोना जैसे वायरसों से बचने के लिए हमें उन कारणों को दूर करना होगा जिनसे ये वायरस फैल रहे हैं। 1918 के स...

अध्ययन में खुलासा : संक्रमित की सांस, गाने व बोलने तक से हवा में फैल रहा है वायरस Download Amar Ujala App for Breaking News in Hindi & Live Updates. https://www.amarujala.com/channels/downloads?tm_source=text_share

सार-संक्षिप्त : वैज्ञानिकों के अनुसार जब संक्रमित व्यक्ति बात करता, सांस करता, चिल्लाता, गाना गाता या खांसता व छींकता है तो वह वायरस को दूसरों तक पहुंचा रहा है। विस्तार देश में प्रतिदिन दो लाख से ज्यादा संक्रमित मिलने के साथ ही एक और चिंताजनक खबर है, चिकित्सा जर्नल लेंसेट में प्रकाशित नए अध्ययन ने इस बात के पुख्ता साक्ष्य दिए हैं कि कोरोना हवा से फैल रहा है।  इसमें अमेरिका, यूके और कनाडा के छह विशेषज्ञों ने चेताया कि अगर संक्रमित को आइसोलेट नहीं किया गया तो उसके कारण हवा से लोग संक्रमित हो सकते हैं। अध्ययन में शामिल कोलाराडो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक जोस लुइस जिमनेज ने दावा किया कि हवा सें संक्रमण फैलने के पूरे साक्ष्य मिले हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार संक्रमण हवा से फैलने के मायने हैं कि जब संक्रमित व्यक्ति बात करता, सांस करता, चिल्लाता, गाना गाता या खांसता व छींकता है तो वह वायरस को दूसरों तक पहुंचा रहा है। 40 फीसदी संक्रमण गैर-लक्षण वालों ने फैलाया गैर-लक्षण वाले संक्रमितों ने 40 प्रतिशत संक्रमण फैलाया। वे खांसते हैं न छींकते हैं, जिससे पानी की बड़ी  ड्रॉपलेट निकलें और दूसरो...

Seems to be symptoms of Bipolar Illness ... (HINDI )

सपने में दिखा नाग, युवती ने रचाया विवाह, बोली- मैं नागिन बनना चाहती हूं Muneshwar Kumar  |  Navbharat Times Updated: 16 Sep 2020, 10:32:48 AM हमारा मानना है यह मनोरोग का मामला है युवती हिस्टीरिया का शिकार हो सकती है बाइपोलर इलनेस का भी। ऐसा दावा मैं अपने बरसों बरस ऐसे ही मनोरोगियों के लक्षण देखने गुनने पढ़ने समझने के बाद कर रहा हूँ।  मनोविज्ञान के स्तर पर यह अटेंशन सीकिंग व्यवहार है उपेक्षिता की अपनी और ध्यान खींचने की कोशिश है हिस्टीरिया का दौरा है जो एक मॉडिफाइड ईसीटी से ठीक हो जाएगा।  सवाल यही है बिल्ली के गले में घंटी कौन बांधे ? शुद्ध साई -कोटिक फीचर्स हैं इस युवती के। इसे इलाज़ की एंटी -साई -कोटिक ,न्यूरोलेप्टिक ,एंटी -ऑब्सेसिव ड्रग्स की जरूरत है।निदान के लिए इसे निकटस्थ परासिया तहसील मनोरोग केंद्र ले जाया जाए। यही फौरी जरूरत है।क्या छिंदवाड़ा जिले के इस कस्बे में एक भी युवक पढ़ा लिखा नहीं है जो ऐसी पहल को आगे आये ? हमारा मानना है युवती को आया लोकलुभाउ स्वप्न एक ट्रिगर हो सकता है मनोरोग का कारण नहीं इसके बीज हमारे जीवनखण्डों हमारे परिवेश में रचे बसे हो स...

PROACTIVE -Physiotherapy and Osteopathy Centre Prime Hospital and Orhto Centre ,Sector -30 ,Faridabad -121 003

PROACTIVE -Physiotherapy and Osteopathy Centre Prime Hospital and Orhto Centre  ,Sector -30 ,Faridabad -121 003  M(98105 78680 /98 18494 769 ) अपने लघु कलेवर में एक बड़ा अस्पताल और भौतिक - चिकित्सा केंद्र है छोटी -छोटी अस्थियों की पड़ताल करने वाली ओस्टेओपेथी चिकित्सा पद्धति भी यहां उपलब्ध है जो छोटी से छोटी अस्थि की मार्फ़त सभी अंगों की पड़ताल करने वाली सम्पूर्ण चिकित्सा पद्धति कही जा सकती है।भौतिक चिकित्सा का तो यह अप्रतिम आलादर्ज़े का केंद्र है ऐसा मैं अपने व्यक्तिगत अनुभव से कह सकता हूँ। भौतिक विज्ञानों के लोकप्रिय हिंदी  लेखन की विधा से मुक्त रूप जुड़ा रहा हूँ ,मैं, एक मुक्त पत्रकार कर्म करने वाले स्वास्थ्य विज्ञान संचारक के बतौर। आकस्मिक रूप से मुंह के बल गिर जाने के बाद मैं अपना बाया कांधा अंदरूनी तौर पर जख्मी कर बैठा हूँ। 'टॉर्न शोल्डर मसल' डायग्नोज़ हुआ है। इसी सिलसिले में एक पेशेंट के बतौर मेरा इस अस्पताल में  आना हुआ। मैंने गत दो माह के अपने अनुभव में  देखा यहां के चिकित्सक अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉक्टर राजीव जी गुप्ता M.S. ह...

Plasma therapy is no surefire cure for Covid Opinion by John P. Moore and Melissa Cushing

John P. Moore, PhD, has studied antiviral antibodies and how vaccines can trigger their production for more than 30 years. He is a professor of microbiology and immunology  at Weill Cornell Medicine in New York City.  Melissa Cushing, MD, is the medical director of transfusion medicine and vice chair of laboratory medicine at New York-Presbyterian Hospital, Weill Cornell Campus. She is the principal investigator for the  New York Coordinating Center of CONCOR-1,  one of the largest Covid-19 convalescent plasma randomized clinical trials in the world. The opinions expressed in this commentary are the authors'. View more opinion on CNN. (CNN) The Food and Drug Administration's shocking decision this week to allow the use of Covid-19 convalescent plasma to treat sick patients  was by all appearances  motivated by a desire to appease President Donald Trump rather than on any serious consideration of the science. FDA Commissioner Stephen Hahn left the ...